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मोदीजी के इंटरव्यू पर बवाल क्यों ?

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार द्वारा लिया गया इंटरव्यू इस समय कईयों को नागवार गुजर रहा है। राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी दलों के नेता इस अराजनैतिक इंटरव्यू से अकारण ही राजनीतिक रूप से परेशान हैं। तकलीफ इस बात से है कि यह इंटरव्यू अभी क्यों आया और दूसरा यह कि अराजनैतिक सवालों के जवाबों ने भी मोदीजी को हीरो बना दिया। मीडिया नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के इस अनोखे प्रचार अभियान से हैरान है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने तो इतना तक कह दिया कि भारत के सभी राजनेताओं को ऐसा इंटरव्यू देना चाहिये ताकि लोग उनकी विभिन्न विषयों पर सोच जान सकें।

विपक्षी दलों को सूझ नहीं रहा कि आखिर करें तो क्या करें? पूरें देश में चुनाव की आचार संहिता लगी हुई है कुल लोकसभा सीटों में से आधी सीटों पर चुनाव पूरा हो चुका है और ऐसे समय में आए इस इंटरव्यू ने मानों पूरे देश में तहलका मचा दिया है और उसका कारण आश्चर्यजनक है कारण है राजनीति से हटकर के विषयों पर देश के प्रधानमंत्री क्या सोचते हैं।

एक सामान्य व्यक्ति जिसके लिये जवाहरलाल नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक के व्यक्ति जिनको एक किवदंती बनाकर प्रस्तुत किया जाता रहा हो और जिनके बारे में आम व्यक्ति की सोच एक दायरे तक सीमित रखने का प्रयास किया जाता हो कि भाई ये बडे लोग हैं और इनकी जीवन शैली आपसे अलग है। ऐसे में यदि देश के प्रधानमंत्री के बारे में अक्षय कुमार के ड्राईवर की बेटी यदि ये जानना चाहे कि हमारे प्रधानमंत्री आम खाते हैं कि नहीं और खाते हैं तो काटकर खाते हैं कि चूस कर तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामान्यजन अपने नेताओं के बारे में कितनी बारीकता से जानना चाहते हैं और यह उनके मन के भावों को प्रकट करता है।

इसमें कोई संदेह नही कि नरेन्द्र मोदी जी की लोकप्रियता ने इसके पहले के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिये हैं तभी तो एक दो साल की बच्ची जो अभी अपने घर के सभी सदस्यों को भी ठीक से नहीं पहचानती है टीवी पर मोदी जी को भाषण देते देख कर मोदी मोदी चिल्लाती है। मित्र लोग यह कह सकते हैं कि इसमें कौन सी बडी बात है तो निकलवा लीजिऐ किसी के नाम से राहुल राहुल या अन्य कोई नाम और वह भी किसी बच्चे से पता चल जाएगा मोदी मोदी ऐसे ही नहीं निकलता। इस इंटरव्यू को भारत के हजारों लाखों लोग देख रहे हैं और पसंद भी कर रहे हैं तो इसके मायनों को समझने की जरूरत है।

रही बात इंटरव्यू फिल्म कलाकार अक्षयकुमार के द्वारा लेने का तो आलोचना करते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिये कि अभिनेत्री सिम्मी ग्रेवाल ने भी श्री राजीव गांधी का इंटरव्यू लिया था और वह प्रसारित भी हुआ था। आज सोशल मीडिया के युग में अभिनेता भी जनता से सीधे सरोकार रखते हैं और अक्षयकुमार तो वैसे भी अपने आप में नए भारत के मनोज कुमार बन गए हैं जिनकी सोच टुकडे टुकडे गैंग और पुरस्कार वापसी समूह से बहुत अलग हटकर एक देशभक्त नागरिक की बनी है। प्रधानमंत्री जी के इस अराजनीतिक साक्षात्कार से कई गूढ बातें निकलकर सामने आई हैं मसलन आपके पास अलादीन का चिराग हो तो आप क्या करेंगे?

जवाब देखिए कि मैं पूरे भारत के समाजशास्त्रीयों और शिक्षाविदों से आग्रह करूंगा कि वो बच्चों को ऐसी कहानियॉं सुनानी बंद कर दें जो उन्हे कर्म करने से रोकती हों। और कोई होता तो अपने लिये अलादीन के चिराग से बहुत सारा धन वैभव मांगता लेकिन ये मोदीजी हैं और उनकी इसी सोच ने उनको मोदी बनाया है। इसलिये सकारात्मक सोच के साथ इंटरव्यू देखिये और उसमें छिपे अर्थों को समझने का प्रयास कीजिये बहुत कुछ मिलेगा। और हॉं किसी ने भी मना नहीं किया है राहुल गांधी को इंटरव्यू देने के लिये। लेकिन कोई लेने के लिये आए तो सही? इंतजार कीजिये और कोई खुद होकर नहीं आए तो बुला लीजिये किसी को भी आपके पास तो बहुत बडी टुकडे टुकडे गैंग है।

– डॉ. क्षितिज पुरोहित, मंदसौर

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