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“युवा वर्ग में व्यक्तित्व के कमजोर पक्ष“ गलती किसकी ?

उज्जैन। भारतीय शिक्षण मंडल मालवा प्रांत के महिला प्रकल्प के रत्नावली मंडल की डिजिटल बैठक संपन्न हुई । इस बैठक में “युवा वर्ग में व्यक्तित्व के कमजोर पक्ष“ गलती किसकी ? इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। बैठक का प्रारंभ धेय वाक्य के द्वारा किया गया।

बैठक में श्रीमती उर्मिला जोशी के द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के इस युग में बच्चों की हर गतिविधि पर ध्यान देना माता पिता का प्रथम कर्तव्य है। बच्चों को दृढ़ संकल्प के द्वारा भविष्य निर्माण का संकल्प कराना आवश्यक है। श्रीमती रत्ना व्यास के द्वारा बच्चों के साथ माता-पिता के संवाद शक्ति को बढ़ाना चाहिए जिससे उनका मानसिक विकास सफल हो सके। नीति टंडन के द्वारा इस अवसर पर कहा गया कि बाल्यावस्था में जिस प्रकार घर का परिवेश जिम्मेदार है उसी प्रकार युवावस्था स्वयं की जिम्मेदारी है युवाओं को अपने भविष्य का निर्माण स्वयं करना चाहिए। शोभना जोशी के द्वारा कहा गया कि देश का युवा वर्ग सिखाने की अपेक्षा अनुसरण से ज्यादा सीखता है।

बैठक में मंडल की संयोजिका श्रीमती रेखा भार्गव के द्वारा व्यक्तित्व निर्माण के मजबूत पक्ष शिक्षा धर्म चरित्र निर्माण व देश के विषय में बता कर उसके सबसे कमजोर पक्ष जो कि आज सबसे ज्यादा जिसकी युवाओं में कमी है वह है धैर्य, उसको पकड़ने के लिए युवाओं को सहस्त्र 12 असफल होकर भी नए प्रयास की ओर बढ़ना चाहिए और यह परिवार व समाज के सहयोग के बिना संभव नहीं है।

अंत में प्रांतीय महिला प्रमुख डॉ. प्रेरणा मनाना ने समग्र रूप से कहा संयुक्त परिवार की कमी, व्यवसायिक प्रतिस्पर्धी युग में माता पिता के पास समय का अभाव, महंगे स्कूलों में एडमिशन करा देने के बाद बच्चों का संपूर्ण विकास शिक्षकों द्वारा हो जाएगा यह मानसिकता और समग्र विकास की तुलना में सिर्फ मानसिक विकास, अंको के खेल में उलझाव, शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ नौकरी पाना ना कि एक अच्छे व्यक्तित्व का विकास करना है। यह सभी कारण है कि आज युवा वर्ग का व्यक्तित्व सुदृढ़ रूप से समग्र रूप से विकसित नहीं है तुम केवल पढ़ाई कर लो बाकी हम सब कर लेंगे यह कह कर कई बार माता-पिता बच्चों को जिम्मेदारियों का सामना नहीं करवाते जिससे कि उन्हें व्यवहारिक ज्ञान की कमी महसूस होती है जब वे व्यवहारिकता से रूबरू होते हैं तो कई बार असफलता को सहन नहीं कर पाते और अपनी जीवन लीला को खत्म करने जैसे कदम ही उठा जाते हैं । बैठक का समापन कल्याण मंत्र के द्वारा किया गया।

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