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विकास दुबे के आपराधिक और आर्थिक साम्राज्य की परतें खोलने के लिए दिल्ली से लखनऊ तक तलाश, एसआईटी और ईडी मुस्तैद

लखनऊ/नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे के परिवार और सहयोगियों के खिलाफ जल्द ही मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत दर्ज करने की तैयारी में है। निदेशालय ने विकास, उसके परिवार और सहयोगियों के अवैध लेनदेन और अकूत संपत्ति की जांच तेज कर दी है। ईडी ने पुलिस से विकास व उसके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और सभी मामलों में जानकारी मांगी है।

इस बीच, राज्य सरकार ने विकास की पूरी आपराधिक कुंडली खंगालने व अफसरों-पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के आरोपों की जांच के लिए विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) बनाया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में दल में अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा व पुलिस महानिरीक्षक जे. रवींद्र गौड़ सदस्य होंगे। दल को 31 जुलाई तक रिपोर्ट देनी है।

राजनीतिक संरक्षण व पुलिस की मिलीभगत से पनपे गैंगस्टर विकास के आपराधिक व आर्थिक साम्राज्य की परतें खोलने के लिए लखनऊ से दिल्ली तक सक्रियता बढ़ी हुई है। ईडी जल्द ही मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज करेगा।

ईडी यह भी जांच करेगा कि क्या विकास, उसके परिवार व सहयोगियों ने देश-विदेश में अवैध चल-अचल संपत्ति खरीदी थी? आरोप है, विकास ने आपराधिक गतिविधियों से अकूूत संपत्ति अर्जित की थी। यूपी व आसपास इलाकों में दुबे व उसके परिवार की दो दर्जन से ज्यादा नामी और बेनामी संपत्ति, बैंक डिपॉजिट केंद्रीय एजेंसी के रडार पर हैं।

सहयाेगी ने खरीदी थी दुबई-थाइलैंड में प्रॉपर्टी

सूत्रों के मुताबिक, विकास के एक सहयोगी ने दुबई और थाइलैंड में संपत्तियां खरीदी थीं। यह भी आरोप है विकास ने लखनऊ में 20 करोड़ से एक घर खरीदा था। इसके अलावा, नामी-बेनामी 20 से ज्यादा मकान व फ्लैट हैं। नोटबंदी से पहले 6.30 करोड़ रुपये ब्याज पर भी दिए थे। वह एक बड़े कारोबारी के लिए प्रॉपर्टी डीलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का भी काम करता था।

इन मुद्दों पर एसआईटी जांच

  • विकास के मुकदमों में कार्रवाई? सजा दिलाने के लिए पर्याप्त कोशिश हुई या नहीं?
  • 13 मार्च को दर्ज केस, जिसका जिक्र सीओ ने किया था, उसमें जमानत रद्द क्यों नहीं हुई?
  • एक साल की कॉल डिटेल से पता लगाएं कि उसने किन पुलिस अफसरों से बात की।
  • विकास व गैंग पर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर, एनएसए में क्या कार्रवाई की? नहीं, तो किसकी लापरवाही?
  • अवैध रूप से अर्जित संपत्ति का ब्योरा जुटाने के साथ पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत?

आयोग पर भी विचार

जांच के लिए न्यायिक आयोग भी बन सकता है, जो एसआईटी की जगह ले सकता है। सरकार ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जांच पर रोक नहीं

ईडी अधिकारियों का कहना है, भले ही विकास मारा जा चुका है, लेकिन पीएमएलए की धारा 72 में मृत या दिवालिया होने के बाद भी कार्रवाई जारी रखने का प्रावधान है।

बिकरू में आरएएफ का डेरा

गैंगस्टर विकास के गांव बिकरू में शनिवार को रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती कर दी गई। ग्रामीणों से पुलिसकर्मी लूटे गए हथियारों की जानकारी भी ले रहे हैं।

एनकाउंटर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर

विकास दुबे व उसके साथियों के एनकाउंटर को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में एनकाउंटर की जांच सीबीआई, एनएआई या अदालत की निगरानी में कराने की मांग की गई है। याचिकाओं में कहा गया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिससे कि इन घटनाओं के पीछे शामिल पुलिसकर्मियों व नेताओं व अन्य लोगों की भूमिका का पता चल सके। इससे पहले, शुक्रवार को एनकाउंटर के चंद घंटों पहले वकील घनश्याम उपाध्याय ने याचिका दायर कर विकास का एनकाउंटर किए जाने की आशंका जताई गई थी।

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