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मीडिया में हिसाब देते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रानिक मीडिया उनके पांच वर्षों के कार्यकाल में सिर्फ इस बात से परेशान रहा कि नरेन्द्र मोदी कभी मीडिया से बात नहीं करते कभी प्रेस कांफ्रेंस नही करते। लेकिन पिछले एक सप्ताह से जिस प्रकार से नरेन्द्र मोदी मीडिया से रूबरू हो रहे हैं उससे मीडिया जगत में बडी हलचल है।

प्रधानमंत्री के अपने कार्यकाल की शुरूआत से लेकर बालाकोट की एयर स्ट्राईक तक के सभी लिये गए निर्णयों फिर वह चाहे नोट बंदी हो या वन रैंक वन पेंशन, जीएसटी लागू करने का विषय हो या सेना को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में किये गए प्रयास हों। अपने विदेश दौरे हो या फिर अपना व्यक्तिगत जीवन और दिनचर्या। सभी विषयों पर प्रधानमंत्री मीडिया के सभी छोटे बडे सवालों का खुलकर जवाब दे रहे हैं। साथ ही जैसा उन्होने पहले कहा था कि मैं जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड रखूंगा अपने काम का पूरा हिसाब दूंगा तो ऐसा भी वह करते दिख रहे हैं।

हम भारतवासियों को बडा आश्चर्य हो रहा है यह सब देखकर क्योंकि इसके पहले कभी किसी प्रधनमंत्री स्तर के नेता ने ना तो जनता के साथ अपना जुडाव इस प्रकार से रखा और ना ही कभी अपने काम का हिसाब देने की कोशिश की। जनप्रतिनिधि अपने मिले कार्यकाल में जनता की सेवा के लिये क्या काम करते हैं और किस तरह काम करना चाहियेे इसकी मिसाल श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्वयं के जीवन से स्थापित की है। 18 से 20 घंटे काम उन्होने स्वयं भी किया और अपने मंत्रियों और सांसदों से भी करने का आग्रह किया। वास्तव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काम करने के तरीकों और जवाबदेही पूरी करने के मामले में ऐसी मिसालें खडी कर दी हैं जो भविष्य के लिये मील का पत्थर बन गई हैं और भविष्य में किसी भी स्तर पर राजनीति या जनसेवा करने वालों को कम से कम इतना करने की मानसिकता लेकर ही जनता के बीच जाना होगा।

बकौल स्वयं नरेन्द्र मोदी छोटे छोटे ऐसे कई काम हुए हैं जो किसी भी स्तर पर चर्चा का विषय नहीं बनते हैं फिर वह केन्द्रीय सचिवालयों के कर्मचारियों के समय पर ऑफिस पहुॅचने का मामला हो या केन्द्र सरकार के कार्यालयों में बडी लाईट हटाकर सीएफएल के प्रयोग से सरकार के लाईट के खर्च में कटौति करने जैसा काम हो। विदेश दौरों पर जाते समय अधिकांश रात्रि में यात्रा करने ताकि विदेशों के महंगे होटलों का किराया बचाया जा सके या फिर बडे लाव लश्कर को विदेश दौरों पर प्रतिनिधिमंडलों के नाम पर ले जाने में कमी लाना हो। प्रधानमंत्री का हर काम देश को लाभ पहुॅंचाने की चिंता करते हुए होता है।

नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में आधे से ज्यादा मीडिया हाउस तो सिर्फ इसलिये नाराज हो गए थे क्योंकि विदेशी दौरों पर मजे मारने और सरकारी खर्च पर ऐशो आराम के उनके मंसूबों को नरेन्द्र मोदी ने जमीन दिखा दी थी। कांग्रेस की सरकार के समय आमतौर पर बडे बडे प्रतिनिधिमंडल विदेश दौरों पर बिना किसी काम के सरकारी खर्च पर जाते रहे और गुलछर्रे उडाते रहे ऐसी परम्परा ही बनी हुई थी। उन सभी को तकलीफ होना अत्यंत ही स्वाभाविक था। बहरहाल प्रधानमंत्री अपने काम का हिसाब दे रहे हैं और अपने उपर लगे सभी आरोपों का भी जवाब दे रहे हैं। उनकी चिंता पर मीडिया हाउस ध्यान दे ंतो अच्छा रहेगा कि कोई कांग्रेस से भी तो पूछो कि उन्होने सत्तर साल तक देश की जनता को गुमराह क्यों किया? कोई ममता बेनर्जी से भी तो पूछो कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की हालत इतनी चिंताजनक क्यों हो गई? और कोई मायावती और अखिलेश यादव से भी तो पूछो कि आजम खान जैसे नेता जयाप्रदा पर इतनी गिरी हुई टिप्पणी करने के बाद भी उनकी पार्टी में क्यों है? देश का चौकीदार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने में लगा है। अपने काम का हिसाब भी दे रहा है और जनआकांक्षाऐं भी उसके साथ जुडी हैं जनता नरेन्द्र मोदी को भारत का एक बार पुनः प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प कर चुकी हैं। ?

नरेन्द्र मोदी जी के सामने विपक्ष कहीं है ही नहीं और है भी तो उस पर भरोसा नहीं क्योंकि बडे तो बडे सही छोटे बच्चों को भी आशंका है जैसा कल वाराणसी के घाट पर एक वरिष्ठ महिला पत्रकार से पूछा? कि क्या राहुल गांधी प्रधानमंत्री जैसे सभी विषयों पर पूछे जाने वाले प्रश्नो का उत्तर दे सकते है? एक छोटी बच्ची का प्रश्न था कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो भारत को बुरा भला क्यों कहते हैं? इस बात का कांग्रेस के पास कोई जवाब नहीं है। तो मीडिया इन दिनों पूरी तरह से नरेन्द्र मोदी जी के आसपास केन्द्रित है तो इसमें गलत क्या है?

– डॉ. क्षितिज पुरोहित 9425105610

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