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मेरा घर ही नहीं, मेरे जहान हो आप पापा

बचपन में आपने कंधो पर बिठाया है,
सपनों के बाजार में मुझे घुमाया है ।

रातों की नींद खराब कर,
बचपन में मैंने आपको भी जगाया है ।

करते हो चिंता मेरी, ये आपने नहीं बताया है ,
मर्द को दर्द नहीं होता,लगता है ये किस्सा आपको भी किसी ने सुनाया है ।

जिंदगी को आपने बच्चों को खुश करने के लिए लुटाया है,
ना जाने कितने कर्जों ने आपको झुकाया है ।

इतना कुछ कर भी आप कुछ नही कहते पापा,
मां के आगे आपका जिक्र सब भूल जाते है पापा।

आप भी किसी भगवान से कम नहीं,
ये बात आप नही जानते पापा।

खुद के सपने छोड़ ,
मुझे आपने पूरा किया है पापा।

पॉकेट मनी के बहाने ख्वाइशो को पर दिए है आपने पापा,
दर्द का जिक्र ना कर मजबूत बनना आपने ही सिखाया है पापा।

मेरे सपनो की उड़ान ही आप हो पापा।
मेरा घर ही नही, मेरे जहान हो आप पापा।

लेखिका
हर्षा बाबानी, मंदसौर (म.प्र.)

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