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मंदसौर-नीमच जिला बन चुका है वैश्यावृत्ति का बड़ा हब

गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठा रहे है मानव तस्कर..!

पूर्व पुलिस अधीक्षक डॉ.पाठक ने दिखाई थी मानव देह व्यापार में विशेष रूचि

पूर्व टीआई श्री अनिरूध्द वाधिया एवं ज्योति शर्मा ने निभाई थी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

स्पेशल रिपोर्ट

मंदसौर, 04 जनवरी । मंदसौर-नीमच जिला मानव तस्करी और वैश्यावृत्ति का बड़ा हब बनता जा रहा है। यहां दुधमुही बच्चीयों, छोटी बच्चियों और नाबालिक बच्चियों की खरीद फरोख्त बड़े पैमाने पर हो रही है और फिर उन्हें वैश्यावृत्ति के धंधे में धकेला जा रहा है । मंदसौर-नीमच जिला बांछड़ा समुदाय के डेरों की खास जगह है और इस समुदाय में देह व्यापार को सामाजिक मान्यता है। यह समाज अपनी दो वक्त की रोटी कमाने के लिए लड़कियों से जिस्मफरोशी का धंधा करवाता है।

इस बांछड़ा समुदाय की खास बात यह है कि यह अपनी बेटियों को तो पढ़ाते-लिखाते है, उनकी धूमधाम से शादियां करवाते है लेकिन दूसरे समुदाय की गरीब परिवारों की लड़कियों की खरीद-फरोख्त करते है और उनको वैश्यावृत्ति के धंधे में धकलते है।

पूरे देश के विभिन्न राज्यों के छोटे-छोटे शहरों और ग्रामों से मानव तस्करी के माध्यम से बच्चियों की मंदसौर-नीमच जिले में खरीद फरोख्त होती है। अगर मंदसौर का इतिहास उठाकर देखा जाए तो दस वर्ष पूर्व पुलिस अधीक्षक डॉ.जी.के. पाठक के कार्यकाल में मानव तस्करी के विरूध्द जबरदस्त कार्यवाहियां हुई थी और पूरे जिले में बांछड़ा के डेरो से 100 से अधिक लड़कियों को छुड़ाया गया था। इन 100 से अधिक लड़कियों में आधे से ज्यादा बच्चीयों को अपहरण कर लाया जाकर यहां बेचा गया था वहीं कुछ लड़कियों को उनके ही मां-बाप ने गरीबी के कारण बेचा था।

डॉ.जी.के.पाठक के जाने के बाद आए पुलिस अधीक्षकों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वर्ष 2018 में जब पुलिस अधीक्षक के रूप में श्री मनोज कुमार सिंह थे तो उनके कार्यकाल में दो मामले हुए थे। 6 जनवरी 2018 को महाराष्ट्र के ग्राम मोई चिकनिया की दो नाबालिग को खरीदकर लाया गया था और उन दोनों से ग्राम डिगांवमाली में देह व्यापार करवाया जा रहा था। यह दोनों नाबलिग लड़कियां बहने थी जिसमें बड़ी बहन को 40 हजार और छोटी बहन को 90 हजार में खरीदा गया था। इन दोनों नाबालिग को पुलिस ने छुड़ाया था ।

उसके बाद 20 सितम्बर 2018 को झारखंड की रहने वाली महिला अपनी दुधमुही बच्ची को 30 हजार रूपये में एक दलाल के माध्यम से मंदसौर में बेचने आई थी। पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार सिंह ने कार्यवाही करते हुए इस मामले में दो नाबालिग बच्चीयों को छुड़ाकर तीन महिलाएं और दो पुरूष आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

सब जानने के बाद भी अनजान क्यों ?

मंदसौर-नीमच जले में मौजूद बांछड़ा समुदाय खुलेआम वैश्यावृत्ति करता है, जहां से मानव तस्करी के मामले उजागर होते है । पिपलियामंडी से मल्हारगढ़, नीमच के हाईवे पर, दलौदा से ढोढर के हाईवे पर और जिले के अंदर सीतामऊ रोड़ पर खुलेआम वैश्यावृत्ति होती है । पुलिस की जानकारी में सबकुछ होने के बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता है । मानव तस्करी और वैश्यावृत्ति पर नजर रखने के लिए जो एनजीओ गठित किए गए थे वह भी इस ओर ध्यान नहीं लगाते है।

हाल यह हो गए है कि दस वर्ष पूर्व जो बांछड़ा समुदाय के लोग पुलिस के डर से अपनी बस्तीयां छोड़कर भाग गये थे, उन लोगों ने महू-नीमच रोड़ पर अपने पैर पसार लिए है। जो बांछड़ा समुदाय गांव के अंदर संचालित होता था वह हाईवे के किनारे आ गया है, जो बांछड़ा समुदाय कच्चे मकानों और झोपड़ियों में वैश्यावृत्ति का धंधा करता था उस समुदाय के आज हाईवे के किनारे पक्के मकान बन गए है ।

पूर्व पुलिस अधीक्षक डॉ.जी.के.पाठक ने ली थी विशेष रूचि

ह्यूमन ट्रेफिकिंग (मानव तस्करी) और देह व्यापार को लेकर दस वर्ष पूर्व पुलिस अधीक्षक डॉ.जी.के. पाठक ने विशेष रूचि ली थी। डॉ.पाठक ने बांछड़ा जाति के डेरो का गुप्त सर्वेक्षण करवाया था, तब उनके सामने चौंकाने वाले तथ्य आए थे । इस सर्वेक्षण के दौरान पता चला कि महिला गर्भवती हुई ही नहीं उसके घर में कुछ माह की बेटी है। वहीं किसी-किसी घर में दो से तीन नाबालिग लड़कियां मिली जब लड़कियों के बारे में पूछा गया तो महिलाएं उन्हें अपनी बेटियां बताती तो उनसे बच्चीयों की उम्र पूछी जाती तो किसी की 10 साल, किसी की साढ़े 9 साल और किसी की 9 साल उम्र बताई जाती । इसी आधार पर दबिश दी गई तो कई लड़कियां मिली जिनकी खरीद फरोख्त हुई थी। डॉ.पाठक के मानव तस्करी के विरूध्द चलाए गए विशेष अभियान में 100 से अधिक बच्चीयों को बांछड़ा समुदाय के डेरों से छुड़ाया गया था। जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी ।

मल्हारगढ़ टीआई श्री वाधिया एवं अफजलपुर टीआई ज्योति शर्मा का सराहनीय कार्य

जब ह्मूमन ट्रेफिकिंग (मानव तस्करी) के विरूध्द विशेष अभियान चल रहा था तब मल्हारगढ़ टीआई श्री अनिरूध्द वाधिया थे और अफजलपुर की टीआई ज्योति शरर््मा थी। इन दोनों अधिकारियों ने भी इस विशेष अभियान में सराहनीय कार्य किया। मल्हारगढ़ और अफजलपुर पुलिस तथा एंटी ह्यूमन ट्रेफिकिंग द्वारा लड़कियों की खरीदने संबंधी जानकारी जुटाई गई थी। मल्हारगढ़ टीआई श्री अनिरूध्द वाधिया के नेतृत्व में मल्हारगढ़ पुलिस ने बांछड़ो के डेरो से 31 लड़कियां बरामद की थी, साथ ही लड़कियां जो अपहरण कर लाई गई थी उनमें से 20 लड़कियों को उनके मां-बाप को सुपुर्द किया गया था ।

अपना घर ने भी निभाया था अहम रोल

जब पूरे जिले में मानव देह व्यापार में धकेली गई लड़कियों को पुलिस छुड़ा रही थी तब लड़कियों को कहां सुरक्षित रखा जाए यह एक बड़ा प्रश्न पुलिस के सामने खड़ा हो गया था। ऐसे समय में सीतामऊ फाटक रोड़ पर स्थित अपना-घर आगे आया था तथा बांछड़ा के डेरो से बरामद की गई लड़कियों को अपना घर ने आश्रय दिया था ।

गोदनामा अधिनियम का उठाया जाता है गलत फायदा

मानव तस्करी और वैश्यावृत्ति के मामले में गोदनामा अधिनियम का भी गलत फायदा उठाया जाता है। गोदनामा अधिनियम में नाबालिग बच्चों, दुधमुही बच्चियों की खरीद फरोख्त की जाती है और बांछड़ा समुदाय के लोग इन्हें आगे चलकर वैश्यावृत्ति के धंधे में धकेलदेते है ।

गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठा रहे है मानव तस्कर

मानव तस्करी और वैश्यावृत्ति के मामले में गरीबी और अशिक्षा का भी फायदा मानव तस्कर उठा रहे है। पूर्व में डॉ.जी.के.पाठक के कार्यकाल में जो कार्यवाही हुई थी उसमें यह तथ्य सामने आया था कि अधिकत्तर लड़कियों का अपहरण कर इन्हें डेरो पर बेचा गया था। इनमें से ज्यादातर लड़कियां गरीब परिवारें से थी, जबकि कुछ लड़कियों को उनके घर वालों द्वारा ही बेच दिया जाता है ।

कम उम्र की लड़कियों का रखा जाता है विशेष ध्यान

बांछड़ा डेरो में कम उम्र की लड़कियों को खरीदने के बाद उन्हें बड़े ही एहतियात से रखा जाता है। लड़की को खरीदने के बाद करीब 5 साल तक उसे कमरे से बाहर नहीं जाने दिया जाता ताकि कोई उसे पहचान न लें ।

तीन कड़ियों वाला रैकेट

डेरे पर जिन लड़कियों को अपहरण कर या चुराकर बेचा गया है उसमें तीन कड़ियों वाला रैकेट काम करता है। पहला गिरोह लड़कियों पर नजर रखकर उन्हें नशा देकर चुराता है । दूसरी कड़ी में बिचौलिये इन्हें बांछड़ा जाति के उन लोगों से मिलाकर सौदा कराते है जो इन्हें खरीदते है और तीसरी कड़ी में खुद बांछड़ा जाति के वो लोग होते है जो इन्हें खरीदकर परवरिश करते है और बड़ा होने पर उन्हें वैश्यावृत्ति के धंधे में उतार देते है ।

जनप्रतिनिधियों को भी आगे आना चाहिए

मंदसौर-नीमच जिले के जनप्रतिनिधियों को भी मानव तस्करी एवं वैश्यावृत्ति जैसे गंभीर मामले में रूचि लेना चाहिए। उनके क्षेत्र में मानव तस्कर एवं देह व्यापार का धंध फलफूल रहा है और यह धंधा जनप्रतिनिधियों की विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र का वातावरण विशुध्द कर रहा है। अगर जनप्रतिनिधि इस गंभीर मामले की ओर ध्यान दे तो उनके क्षेत्र में हो रही वैश्यावृत्ति और मानव तस्करी पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकती है ।

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