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मंदसौर जाने के लिए खेत में दौड़े सिंधिया, पुलिस ने किया गिरफ्तार

व्रज वाहन से माननखेड़ा टोलनाके से जावरा तक किया ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रोड़ शो

मंदसौर संदेश/मंदसौर

मंदसौर जिले में उपजे तनाव के बाद 5 किसानों की मौत के कारण देश भर की राजनीति गरमा गई है । लगातार जिले में घुसने के लिए कई बड़े नेता नाकाम कोशिश करते हुए नज़र आ रहे है । हालांकि इसके पीछे उनकी मंशा टीआरपी बटोरने की है या वाकई में किसानों से मिलने की इस पर सस्पेंस बरकरार है । चूंकि किसानों की मौत पर राजनीति करने आये तमाम नेताओ को जिले में घुसने की अनुमति नही मिली है । जिला कलेक्टर भी लगातार इस बात पर अड़े है कि हमने किसी को धारा 144 के अंतर्गत जिले में घुसने की मनाही की हुई है । ऐसे में यह भी प्रÜन चिन्ह खड़ा होता है कि जिला प्रशासन के मना करने पर भी वे आखिर क्यों जिले की बॉर्डर पर आकर तमाशा बनाते है ।

पहले अरुण यादव व अजय सिंह ने कोशिश की जिसके पश्चात राहुल गांधी राजस्थान सीमा निम्बाहेड़ा तरफ से घुसे जहां भी हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ । वे कभी बाइक पर बैठे तो कभी खेतो में दौड़े… खेत मे दौड़ लगाकर पुलिस ने उन्हें पकड़ कर वही बैठा दिया जितने में मधुमक्खी का छत्ता उड़ गया । जिसने वहां मौजूद काफी लोग निशाना बने। उसके बाद योगेंद्र यादव व मेघा पाटकर ने रतलाम जिले की तरफ से मंदसौर में आने की कोशिश की किन्तु गिरफ्तार हुए व कल फिर दोनों बॉर्डर पर फ़ोर्स की जमकर तैनाती हुई ।

दरअसल जिला पुलिस को सूचना मिली थी कि गुजरात मे पटेल आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल निम्बाहेड़ा की तरफ से नीमच जिला होते हुए मन्दसौर में हुए गोलीकांड में मारे गए किसानों से मिलना चाहते है। किन्तु धारा 144 को तहत उन्हें भी रोका गया । यहां तक कि मंदसौर कलेक्टर से बिना अनुमति लिए उन्होंने प्रवेश की कोशिश की जहां उनके पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया किन्तु फिर भी उन्होंने कहा की मैं अपने किसान भाइयों से मिल कर रहूंगा । मैं हमेशा पुलिस के साथ कॉपरेट करता हूँ। और आगे भी करता रहूँगा । इन तमाम बातों के बाद उन पर धारा 151 में मुकदमा दर्ज किया गया । जिसके बाद मुचलके पर रिहा किया गया तथा वे वापस उदयपुर की तरफ लौट गए ।
फिर मध्यप्रदेश कांग्रेस का बड़ा चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया के रतलाम की ओर से माननखेड़ा टोल की तरफ से जिले में घुसने की जानकारी मिली । जहां भी मन्दसौर में धारा 144 के कारण उन्हें भी प्रवेश नही दिया जाना था किंतु जैसा कि पहले हुआ उसी तर्ज पर हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ। जहां जिला कांग्रेस के कई छोटे- बड़े नेता पहुंचे जो कि 10 बजे से ही अपने नेता जी के आने का इंतज़ार कर रहे थे। जिनकी सूचना वे लगातार ले रहे थे कि सिंधिया अभी कहां तक पहुचे है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के जिले में आने का समय करीब 11 बजे का था लेकिन वह उज्जैन से जावरा के बीच कई सभाएं निपटाते हुए आ रहे थे इसलिए वह दोपहर डेढ़ बजे माननखेड़ा टोल पर पहुचे । जहां पहले भी भारी संख्या पुलिस फ़ोर्स तैनात था।

मंदसौर जिले में सिंधिया का प्रवेश ना होने के लिए बॉर्डर पर रैपिड एक्शन फ़ोर्स के जवान, एमपी पुलिस के जवान व मन्दसौर- रतलाम जिले के बड़े अधिकारी भी पहुंचे थे। डेढ़ बजे जब सिंधिया पहुचे तो जिला कांग्रेस के कई नेताओ ने शिवराज सरकार के खिलाफ नारेबाजी की जिसके बाद उनको साथ मे लेकर भारी धूप में ही पुलिस द्वारा लगाए गए बेरिकेटस के उस पर धरने पर बैठ गए। जहां उन्होंने अपना विरोध दर्ज करवाया । किन्तु हाई वोल्टेज ड्रामें का मुख्य सीन अभी बचा हुआ था । जैसे ही सिंधिया को लगा कि पुलिस फ़ोर्स पुरी तरह से शांत है। उन्होंने आव देखा ना ताव अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की तर्ज पर खेतो में दौड़ निकले जहां उन्होंने पीछे समस्त कार्यकर्ता भी भागे । किन्तु पुलिस ने वहां उन्हें घेर कर हिरासत में ले लिया। हालांकि हिरासत में लेने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करना पड़ी। जिसके बाद पुलिस के वज्र वाहन में ज्योतिरादित्य सिंधिया रोड़ शो करते हुए जावरा पहुंचे जहां धारा 144 का उलंघन करने पर उन पर धारा 151 के तहत कार्यवाही की गई व उन्हें भी मुचलके पर रिहा कर दिया गया ।

हालांकि अब तक यह बात समझमें नही आई कि आखिर किसानों की मौत पर राजनीति क्यों जब जिले में धारा 144 लगी हुई व तमाम नेताओ को आने से रोका जा रहा है तो फिर आखिर घुसने की नाकाम कोशिशें क्यों ?

मंदसौर संदेश स्पॉटलाइट

इस पूरे घटना क्रम में दैनिक मन्दसौर संदेश कुछ विशेष बाते खोज कर लाया हैः-

पहलाः     जब किसान आंदोलन के चलते तीनों जिलों में धारा 144 लगी हुई है तो फिर रतलाम से आने वाले नेताओ को रतलाम जिले की सीमा में घुसने से पहले ही क्यों नही रोका जा रहा है ?

दूसराः     माननखेड़ा टोल पर लाउड स्पीकर लगा कर निवेदन पूर्वक यह बात कही जा रही थी की जावरा में धारा 144 लगी हुई है। आप सभी से निवेदन/ अनुरोध है कि यहां से चले जाएं अन्यथा मजबूरन आपको पुलिस को गिरफ्तार करना पड़ेगा । ये विषय भी सोचने वाला है ?

तीसराः     कांग्रेस के कुछ नेता हाथ पर काली पट्टी बांध कर यह कह रहे थे कि हम शिवराज सरकार का विरोध कर रहे है। जिसमे भी सोचने वाले विषय यह बना कि यह नेता शहर में काली पट्टी बांध कर नही घूम रहे थे और सिंधिया आने वाले थे तो काली पट्टी बंधी गई । अब आखिर यह विरोध था किसका ?

चौथाः     समस्त नेताओ को इस बात की जानकारी है कि फिलहाल गोलीकांड के बाद तीनों जिले संवेदनशील परिस्थिति से गुजर रहे है। ऐसे में वो बाद में भी आ सकते थे। पहले आकर जिले की कानून व्यवस्था बिगाड़ कर व दिन भर टीवी चैनल पर अपनी तस्वीर चला कर वे क्या साबित करना चाहते है ?

पांचवाः         पुलिस द्वारा जब ज्योतिरादित्य सिंधिया को माननखेड़ा टोल से गिरफ्तार कर वज्र वाहन में बिठाया गया तो फिर उन्होंने वज्र वाहन की ऊपर की खिड़की खोल कर वहां से रोड शो करते हुए जावरा क्यों ले जाया गया । ऐसे में यह गिरफ्तारी थी या रोड शो का नया तरीका..! मतलब कुल मिला कर पुलिस ने गिरफ्तार कर सिर पर बैठा लिया ।

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