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पत्रकार का पत्रः कोरोना महामारी में जारी राहत पैकेज में पत्रकारों को क्या मिला?

Reporter

कोरोना महामारी से पूरी दुनिया अछूती नहीं है। 3 लाख से ज्यादा लोग मारे गए है, लाखो लोग अभी भी प्रभावित है और दिनों दिन संख्या बढ़ ही रही है। भारत में भी यही हालात है, लेकिन ये जानकारी आप तक पंहुचा कौन रहा है “पत्रकार“ , वो पत्रकार जिसे कोरोना वॉरियर्स की लिस्ट में किसी ने शामिल ही नहीं किया।

वो रोज पलायन करते हजारो मजदूरों को दिखा रहा है वो रोज़ हर एक तस्वीर जिम्मेदारों तक पहुंचा रहा है, आमजन तक पंहुचा रहा है. और वो हमेशा अपनी जिम्मेदारी निभाएगा इसलिए क्योकि वह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। उसे पता है की उसके खड़े रहने से आप घर में बैठकर लाईव समाचार देख रहे है और अपने मोबाइल में दैनिक अखबारों की पीडीएफ पढ़ रहे हो, पर क्या आपको पता है की कोरोना महामारी के बीच जहां हर वर्ग के लिए सरकारे कुछ कर रही है उसमे उन पत्रकारों का जिक्र ही नहीं है, ना कोई बीमा ,न अलग से कोई राशन और न कोई आर्थिक सहायता।

कोरोना महामारी के बीच पिछले दो महीनो से विज्ञापनों की आमद भी बंद है, फिर कैसे एक अख़बार का मालिक और एक चैनल का कर्ताधर्ता अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन दे सकता है, लेकिन वो फिर भी दे रहा है। उसे पता है सरकारों को पता रहे न रहे पर हमारा पत्रकार ग्राउंड जीरो पर जाकर या ऑफिस में बैठकर खबर तैयार कर रहा है। हर वो खबर जो आपके लिए खास है, लेकिन इस परिस्थिति में सिवाए खबरों की तारीफ के उन्हें और कुछ मिल ही नहीं रहा, जो वो “आश्वासन“ मिलता है न कभी-कभी वो भी नहीं मिल रहा। इसके आलावा कई पत्रकारों को अपना काम करते वक्त आ रही परेशानी तो आम बात है।

विडंबना है की आमजनता की आवाज को सरकारों तक पहुंचाने वालो की आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं, हालांकि पुरे देश में हमारे जाने कितने संगठन होंगे। मंदसौर शहर सहित जिले की बात करे तो कई संगठन है पर कुछ एक संगठनों को छोड़ दे तो वो भी निचले और गरीब तबके के पत्रकारों की आवाज़ सख्ती से आगे पहुंचाने में कामयाब नहीं हुए। हालांकि ज्ञापन दिए गए, पर आपको पता है कोरोना संकट में जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री कोरोना से प्रभावित जिलों का दौरा नहीं कर रहे तो वो कागज कौन से सन् में सरकार तक पहुंचेगा पता नहीं।

सालो से चली आ रही पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट की मांग तो पूरी हो न सकी अब कोरोना संकट में क्या उम्मीद मौजूदा सरकार से हम करे समझ नहीं आ रहा. बरहाल आप छोड़िए हमें कुछ मिले न मिले पर आपको सरकार क्या-क्या देगी ये जानकारी हम आप तक हमेशा पहुचायेंगे, क्योकि हम वो चौथा स्तम्भ है जो जमीन में गड़ा तो है लेकिन उसकी नींव अंदर से कितनी खोखली होती जा रही है ये कभी किसे पता नहीं चलेगा।

पत्र लेखकः
कमलेश गड़िया, मंदसौर
मोबाईल 9074491678

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