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कैसे मिलेगा मध्यप्रदेश में महिलाओं को न्याय ?

प्रदेश के जिलों के महिला डेस्क की स्थापना तो हुई लेकिन स्टॉफ की कमी के चलते नहीं हो पा रहा है महिला डेस्क का संचालन !

मंदसौर जिले में भी 14 थानों में महिला डेस्क स्वीकृत लेकिन कुछ ही थानों पर महिला डेस्क का हो रहा है संचालन

Special Report

मंदसौर, 05 जनवरी । प्रदेश के थानों में महिला संबंधी मामले अधिक आते है। गंभीर अपराध जैसे की बलात्कार, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ व महिलाओं संबंधी अन्य अपराध जिसकी फरियाद लेकर महिलाएं जब थाने में पहुंचती है तो महिलाओं को पुरूष पुलिसकर्मियों के सामने खुलकर अपनी बात रखने में परेशानी होती है। महिलाओं के अंदर झिझक सी बनी रहती है। इसके अलावा बयान दर्ज कराते समय भी महिलाएं घटना के बारे में भी विस्तार से जानकारी देने में असमर्थ रहती है। थानों में पुरूष पुलिसकर्मियों के समक्ष अपनी फरियादी सुनाने में महिलाओं को परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए शासन की मंशानुसार महिला डेस्क की शुरूआत की गई थी ।

महिलाओं की सहूलियत के लिए तथा महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, उनकी समस्याओं का तुरंत निवारण करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने प्रदेश के हर थाने में महिला डेस्क खोलने का निर्णय लिया था । इसके लिए पूरे प्रदेश में 700 से अधिक थानों में  जिसमे से मंदसौर जिले में  भी 14 महिला डेस्क खोली गई थी ।

महिला डेस्क के लाभ

महिला डेस्क में जहां आपसी समझौते पर जोर दिया जाता है, वहीं सामान्य पुलिस थानों में तुरंत शिकायत दर्ज करने एवं कानूनी कार्रवाई का भी चलन है । यहां महिलाओं को काउंसलिंग मिलती है। अलग महिला थाना की बजाए हर थाने में महिला डेस्क होना महिलाओं के लिए अच्छा कदम है। जो महिलाएं अपनी पीड़ा पुरूष पुलिसकर्मियों को नहीं बता पाती है वह महिलाएं महिला डेस्क पर खुलकर अपनी बात रखकर कार्रवाई करा सकेंगी। साथ ही जो भी शिकायती आवेदन महिला लेकर आती है उनकी कार्रवाई भी महिला डेस्क से होगी।

महिला डेस्क की प्रभारी रहती है महिला एसआई

पुलिस विभाग की ओर से हर थाने में महिला डेस्क प्रभारी नियुक्त है। कोई भी महिला, बालिका अथवा किशोरी संबंधित अपने क्षेत्र के थानों में महिला डेस्क प्रभारी को अपने साथ होने वाले मामले की खुलकर शिकायत कर सकती है। प्रभारी सब इंस्पेक्टर लेवल की महिला अथवा जहां इस स्तर के अधिकारी नहीं होने पर ए.एस.आई. की महिला अधिकारी के रूप में तैनाती होती है। वहीं महिला प्रधान आरक्षक भी महिला डेस्क का दायित्व संभाल सकती है। इसके अलावा सुनवाई के लिए महिला एसआई के साथ दो महिला पुलिसकर्मी भी रहती है ।

कहीं भवन बने, कहीं कार्य प्रगति पर

महिलाओं की सहूलियत के लिए जब प्रदेश सरकार ने महिला डेस्क खोलने का निर्णय लिया था तथा सरकार ने महिला डेस्क के अलग से भवन बनाने के लिए राशि भी स्वीकृत की थी। इस राशि से कई जिलों में महिला डेस्क के लिए अलग से भवन बनकर तैयार हो गए, कई में भवन में बन रहे है और शेष जिलों में अभी भवन बनने की शुरूआत भी नहीं हुई है ।

स्टॉफ की कमी

प्रदेश में 700 से भी अधिक थानों पर महिला डेस्क की स्वीकृति है और महिला डेस्क की प्रभारी के रूप में महिला एसआई की तैनाती होना है लेकिन पूरे प्रदेश की बात की जाए तो प्रदेश में महिला एसआई की कमी है, वहीं जितनी महिला एसआई है उनमें भी आधे से ज्यादा महिला एसआई महिला डेस्क पर रहना नहीं चाहती है। ऐसे में शासन की मंशानुरूप महिला डेस्क का लाभ महिलाओं को मिल नहीं पा रहा है ।

मंदसौर जिले के 14 थानों में है महिला डेस्क स्वीकृत

जिले में 14 थानों में महिला डेस्क स्वीकृत हुई है। वैसे मंदसौर जिले में कुल 16 थाने है। दलौदा थाना छोटा है और यहां एसआई ही थाना प्रभारी रहता है इस कारण यहां महिला डेस्क की स्वीकृत नहीं हुई, इसी प्रकार गांधीसागर थाना भी छोटा है । वहीं इन दोनों थानों को देखा जाए तो यहां महिला संबंधी अपराध भी बहुत कम हुए है ।

इन दो थानों के अलावा मंदसौर जिले के शेष 14 थानों में महिला डेस्क स्वीकृत है।  वैसे शहर कोतवाली मंदसौर और गरोठ थाने में महिला डेस्क पहले से ही स्वीकृत है। शहर कोतवाली में महिला डेस्क का अलग से भवन है लेकिन शहर कोतवाली मंदसौर के महिला डेस्क की यह स्थिति है कि यहां पर अब तक पदस्थ की गई महिला एसआई कभी छुट्टी लेकर चली जाती है तो कभी महिला एसआई मेटरनिटी लीव लेकर चली जाती है । वहीं दूसरी एसआई जिनको यहां पदस्थ किया जाता है वह यहां रहना नहीं चाहती और नेतानगरी का प्रभाव डालकर देहात थानों में चली जाती है। शहर के थानों में महिला डेस्क पर काम करने के लिए कोई महिला एसआई रूचि नहीं दिखाती है। जिस किसी महिला अधिकारी की यहां पदस्थापना की जाती है वह अपना स्थानांतरण येन-केन देहात थानों में करवा ही लेती है ।

गरोठ थाने में भी महिला डेस्क का संचालन हो रहा है तथा यहां का भवन का निर्माण भी पूर्ण हो चुका है । इसके अलावा भानपुरा थाना, शामगढ़ थाना पर भी महिला डेस्क का संचालन हो रहा है । मंदसौर जिला मुख्यालय पर महिला एसआई की कमी के चलते एक ही महिला एसआई तीन-चार थानों की महिला डेस्क संभाल रही है । कहीं कहीं तो पूरे पुलिस अनुभाग क्षेत्र में एक भी महिला अधिकारी नही है तो कहीं केवल एक ही सारे दायित्व संभालें कार्य कर रही है ।

कैसे मिलेगा न्याय ?

एक महिला कर्मचारी ही दूसरी महिला की समस्या, शिकायत को सही तरीके से जानकर इसका समाधान कर सकती है। ऐसे में महिला डेस्क पद पर पदस्थ महिला एसआई अपने दायित्वों को न समझते हुए छुट्टी लेकर चली जाएगी… या मेटरनिटी लीव पर चली जाएगी… या अपने अटैचमेंट ऑॅफिसों में करवा लेगी… तो न्याय के उम्मीद लेकर आने वाले पीड़ित महिलाएं अपनी व्यथा किसको सुनाएगी ?

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