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क्या नागरिकता मामले में फंस गए हैं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ?

लोकसभा चुनाव 2019 अपने अंतिम चरण में हैं । देश में राजनैतिक पारा बहुत चढा हुआ है और राजनैतिक दलों के नेताओं के आपसी आरोप प्रत्यारोप बेलगाम होकर सारी सीमाऐं लांघ रहे हैं । ऐसे समय में भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रम्हण्यम स्वामी ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ब्रिटेन के नागरिक होने से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर एक नया हंगामा खडा कर दिया है।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी से 15 दिनों में इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने का नोटिस जारी किया है। दरअसल यह सारा मामला इसलिये सामने आया कि राहुल गांधी ने सन 2003 में ब्रिटेन के हैंपशायर में बैकट्राप्स कम्पनी बनाई। राहुल गांधी इस कम्पनी के निदेशक भी थे और सचिव भी। कम्पनी ने ब्रिटेन में अपना व्यवसाय किया और 2005 और 2006 में उक्त कम्पनी के टैक्स रिटर्न्स भरे। दिखने में यह सब सामान्य प्रक्रिया जैसा लगता है और यही व्यवहार व्यावसायिक कम्पनियॉं करती हैं लेकिन राहुल गांधी की चर्चा इसलिये हो रही है कि उन्होने इस कम्पनी के सभी दसतावेजों में अपनी नागरिकता ब्रिटिश उल्लेखित की है !

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 में किसी भी भारतीय नागरिक को दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है मतलब कोई भी भारतीय नागरिक एक साथ दो देशों की नागरिकता नहीं रख सकता है। यदि वह किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार करता है तो उसे भारतीय नागरिकता त्यागनी होती है। राहुल गांधी कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं वे भारत के प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के परिवार की विरासत हैं और उन्होने नागरिकता के इस खेल में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यदि कोई भी संबद्धता रखी है तो आने वाले समय में उनकी मुसीबतें बढ सकती हैं।

स्वाभाविक है इस मुद्दे पर राजनीति होगी ही और हो भी रही है। कांग्रेस इसे बकवास कह रही है और 2015 में भी उठे इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के राहुल गांधी की नागरिकता के आरोपों को खारिज कर दिये जाने के निर्णय की आड ले रही है लेकिन यहॉं एक तथ्य महत्वपूर्ण है कि उस समय राहुल गांधी के संबंध में केवल उक्त ब्रिटिश कम्पनी बैकट्राप्स का केवल पंजीयन प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था लेकिन इस बार भाजपा सांसद स्वामी ने कम्पनी के फाईल किये रिटर्न्स और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किये हैं जिन्हे देखकर प्रथम दृष्टया तो यही लगता है कि राहुल गांधी इस दोहरी नागरिकता के चक्रव्यूह में उलझ गए हैं क्योंकि 2009 में उन्होने उक्त कम्पनी को बंद करने का आवेदन दिया उसमें भी अपनी नागरिकता ब्रिटिश ही बताई है तो क्या? राहुल गांधी ने देश से अपनी नागरिकता के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया? या इसे इस तरह समझने का प्रयास करें कि सत्ता के नशे में चूर कांग्रेस पार्टी को तब ऐसा लगता ही नहीं था कि उनका कभी राज इस देश से खत्म भी होगा इसलिये हमसे कौन पूछ सकता है इसलिये मनमानी करो क्योंकि 2005 -06 में देश में मनमोहनसिंह की सरकार थी और सब जानते हैं सोनिया गांधी सुपर पीएम थीं।

तात्कालिन राजनैतिक परिस्थितियों का आकलन करें तो स्पष्ट दिखाई पडता है कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति कलाम द्वारा सोनिया गांधी को भारत का पीएम नहीं बन सकने की नसीहत देने के बाद उठी अंर्तरात्मा की आवाज ने राहुल गांधी को राजनीति में लाने और सक्रिय कराने की जल्दबाजी में कांग्रेस और उसकी किचन केबिनेट ने राहुल गांधी की नागरिकता के विषय पर ध्यान देना उचित ही नहीं समझा या कहीं ना कहीं कोई चूक हो गई? क्योंकि एक युवराज की भंति उस समय राहुल गांधी प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह के और यूपीए सरकार के अध्यादेश मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से ऐसे फाड रहे थे मानो किसी रद्दी के कागज फाड रहे हों। केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दिए नोटिस के राहुल गांधी के जवाब पर बहुत कुछ निर्भर करेगा क्योंकि 2003 से 2009 की अवधि में राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक रहे हों कि नहीं रहे हों यह प्रश्न गौण हो जाता है क्योंकि उसके बाद वे भारत में बहुत कुछ रहे हैं वे पिछली तीन बार से सांसद हैं और बतौर सांसद उन्होने निर्वाचन आयोग को दिए अपने शपथ पत्रों में नागरिकता के संबंध में यदि तथ्य छुपाए हैं तो वह आपराधिक श्रेणी का कृत्य माना जायेगा दूसरा सांसद के रूप में आपने सांसद के वेतन से लेकर तमाम सुविधाऐं प्राप्त की हैं और कई तरह के लाभ उठाऐं हैं उनका क्या होगा? आप देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं आप अपनी पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं और करोडों मतदाताओं को कैसे समझाऐंगे कि आप भारत छोड कर ब्रिटेन में बसने की पूरी तैयारी कर चुके थे वह तो सोनिया गांधी पीएम नहीं बन सकीं इसलिये आनन फानन में राहुल को भारतीय राजनीति में लांच किया गया और उसी हडबडी में नागरिकता संबंधी विषय कहीं छूट गया तो यह प्रश्न आज पूरे भारत के सामने खडा है कि राहुल गांधी भारतीय नागरिक हैं या ब्रिटिश नागरिक? और यह अकेला प्रश्न नहीं है अभी तो भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रम्हण्यम स्वामी यह भी दावा कर रहे हैं कि राहुल गांधी के पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं। तो निश्चित मानिए राहुल गांधी के लिये आने वाला समय मुश्किलों भरा तो है। कम से कम राहुल गांधी के गृह मंत्रालय के नोटिस के जवाब देने तक तो यह तलवार सिर पर लटकी ही हुई है। राहुल गांधी अपनी नागरिकता के प्रश्न का क्या उत्तर देते हैं इसका इंतजार पूरे देश को है ?

– डॉ. क्षितिज पुरोहित 9425105610

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