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मध्यप्रदेश में तेजी से फैल रहा है कोरोना वायरस, दो हफ्ते में 13 गुना बढ़े मामले

80 फीसदी केस इंदौर और भोपाल में

भोपाल। मध्य प्रदेश में तमाम प्रयासों के बावजूद कोरोना वायरस फैलता जा रहा है। अब तक राज्य में 938 संक्रमित केस सामने आ चुके हैं और 53 लोगों की मौत हो गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक यह राज्य के 52 जिलों में से 24 में फैल चुका है। इन जिलों में प्रदेश की 59 फीसदी आबादी रहती है। दो हफ्ते के भीतर ही (31 मार्च से 15 अप्रैल सुबह) राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 13 गुना तक बढ़ चुकी है। हालांकि इनमें से 80 फीसदी मामले अकेले इंदौर और भोपाल जिले से हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य की जनसंख्या करीब 7.26 करोड़ है। इनमें से 24 जिलों में जहां मरीज मिले हैं, वहां की आबादी 4.29 करोड़ है।

अधिकारियों के मुताबिक राज्य में कुल अभी तक 874 मामले सामने आए हैं, इनमें से 591 (62 प्रतिशत) इंदौर से हैं। जबकि भोपाल से 158 केस अभी तक सामने आए हैं, जो करीब 18 फीसदी हैं। 31 मार्च तक राज्य में 66 केस थे। 14 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में 12,490 सैंपल को जांच के लिए भेजा जा चुका है। इस बीच इंदौर के खजराना क्षेत्र में थाना प्रभारी संतोष यादव कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बाद यहां के सभी पुलिसकर्मियों को क्वारंटीन किया जा रहा है। इस बीच इंदौर के पुलिस महानिरीक्षक विवेक शर्मा ने यह सुझाव दिया था कि कोरोना संक्रमित क्षेत्र में कार्यरत थाना प्रभारी एवं पुलिस कर्मी को नियमित रूप से बदलते हुए अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाए।

भोपाल गैस त्रासदी की जंग जीतने वाले पांच व्यक्ति कोरोना की जंग हारे

करीब 35 साल पहले हुई भयावह औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस कांड की जंग जीतने वाले पांच व्यक्ति कोरोना वायरस महामारी की जंग हार गए। इन पांचों की पांच अप्रैल से लेकर 12 अप्रैल के बीच कोविड-19 से मौत हुई है। कोरोना वायरस के संक्रमण से अब तक भोपाल में कुल पांच व्यक्तियों की मौत हुई और ये पांचों भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित थे।

भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात को यूनियन कार्बाइड के कारखाने से रिसने वाली जहरीली गैस की चपेट में आने से हजारों लोग पिछले करीब साढ़े तीन दशक से तमाम स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

भोपाल गैस पीड़ितों के हितों के लिए लंबे अरसे से काम करने वाले संगठन ‘भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन’ की सदस्य रचना ढींगरा ने बुधवार को बताया कि भोपाल में कोरोना वायरस संक्रमण से अब तक पांच व्यक्तियों की मौत हो चुकी है और ये पांचों भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित थे।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘भोपाल गैस पीड़ितों के लिए बने अस्पताल भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) को राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) उपचार संस्थान के रूप में चिन्हित किया है, जिससे इस अस्पताल में केवल कोविड-19 के मरीजों का ही उपचार हो रहा है। इससे भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को अपना इलाज कराने में बड़ी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।’

ढींगरा ने बताया कि 21 मार्च को गैस पीड़ितों के संगठनों ने राज्य एवं केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर यह बताया था कि गैस पीड़ितों में कोरोना का संक्रमण होने की आशंका अन्य लोगों की तुलना में पांच गुना ज्यादा है। उनका आरोप है कि सरकार ने इस चिट्ठी पर कोई ध्यान नहीं दिया और गैस पीड़ितों के एकमात्र अस्पताल बीएमएचआरसी को गैस पीड़ितों के इलाज के लिए पूर्ण रूप से बंद कर दिया।

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