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72 सालों से एक ही काम कर रही है कांग्रेस, भ्रष्टाचार पर सफाई देना

वर्तमान में लोकसभा चुनाव-2019 का शंखनाद हो चुका है तथा प्रथम चरण के आज मतदान भी हो रहे है । पिछले लोकसभा चुनाव-2014 में कांग्रेस की हुई करारी हार का अगर विश्लेषण किया जाए तो 2014 में हुई हार का कांग्रेस ने कोई सबक नहीं लिया । 2014 में कांग्रेस की हार का प्रमुख कारण उनके नेताओं पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोप थे लेकिन करारी हार के बाद भी कांग्रेस अपनी भूल को सुधारने की जगह वर्तमान में भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सफाई देने का ही कार्य कर रही है ।

कांग्रेस का भ्रष्टाचार पर सफाई देने का नया मामला मध्यप्रदेश का सामने आया है । आयकर विभाग ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबीयों के छापामार की कार्यवाही कर भारी तादाद में टैक्स चोरी पकड़ी । इतनी बड़ी टैक्स चोरी पर कानून को अपना काम करने देने की बजाए कांग्रेस बचाव और आरोप लगाने पर उतर आई । वहीं आयकर विभाग के साथ जो केन्द्रीय रिर्जव पुलिस बल की टीम आई थी उनके साथ स्थानीय पुलिस की तकरार भी हो गई । बताते है कि स्थानीय पुलिस अघोषित तौर पर आयकर विभाग की कार्रवाई का विरोध कर रही थी । जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और सभी यह जानते है कि पूरे प्रदेश की पुलिस की कमान राज्य सरकार के हाथ में ही रहती है तो ऐसे में राज्य की कमलनाथ सरकार पर बाधा पैदा करने का आरोप लगना तय था ।

यहां यह कहा जाता है कि चुनाव के दौरान इस प्रकार की कार्रवाई राजनीतिक कारणों को दर्शाती है । लेकिन दूसरी ओर यह सवाल भी उठता है कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध होने वाली ऐसी कार्यवाहियों का आखिरकार कांग्रेस विरोध क्यों कर रही है । अगर कांग्रेस को लगता है कि आयकर विभाग की यह कार्रवाई गलत है तो इस कार्रवाई को अदालत में चुनौती दी जा सकती है ।

लेकिन विडम्बना यह है कि कांग्रेस को देश की कानून व्यवस्था एवं अदालतों पर भरोसा नहीं है । अगर कार्रवाई द्वेषतावश की गई हो तो न्यायालय दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा और उसके बाद कांग्रेस यह कह सकेगी कि भाजपा सरकार ने राजनीतिक द्वेषतावश छापे डलवाए । तो वहीं मतदाताओं में भी यही संदेश जाएगा कि कि कांग्रेस निर्दोष है । लेकिन कार्रवाई होते ही भ्रष्टाचार पर सफाई देने से तो मतदाताओं के बीच यही संदेश जाएगा कि कांग्रेस भ्रष्टाचारियों को अभी भी संरक्षण देने का काम कर रही है ।

प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग पी चिदम्बरन, राबर्ट वाड्रा सहित कई कांग्रेसी नेताओं और उनके करीबियों पर कार्रवाई कर चुका है। अभी तक अदालत ने एक भी मामले में किसी निर्दोष नहीं माना है। इन सभी पर मनी लॉड्रिंग और जमीनों में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगे हुए हैं।

कांग्रेस पर लगातार लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहे है । लेकिन कांग्रेस भ्रष्टाचार पर सफाई देने की जगह ऐसे मामलों में अगर पारदर्शिता और साफ सुधरी नीति अपनाते हुए यह बयान देती है कि जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे है, जब तक न्यायालय उन्हें इन आरोपों से बरी नहीं कर देते तब तक ऐसे लोग पार्टी से निलंबित रहेंगे तो इसका मतदाताओं पर अलग प्रभाव बनेगा ।

लेकिन भ्रष्टाचार संबंधी मामलों का लगातार विरोध करने से कांग्रेस की पुरानी छबि ओर ज्यादा बिगड़ेगी जिसे भाजपा नेता वक्त-वक्त पर भुनाते रहे है । इसी कारण कांग्रेस को लोकसभा चुनाव 2014 में भारी हार का सामना करना पड़ा था । भ्रष्टाचार के मामलों में कोई स्पष्ट नीति न अपनाकर, सफाई देने की कीमत ही कांग्रेस को चुकानी पड़ रही है । भ्रष्टाचार जैसी बुराई से लड़ने की बजाए कांग्रेस इसके बाच के रास्ते ही खोज रही है ।

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