“कोरोना काल में मंदिर जाए बगैर कैसे करे महादेव को प्रसन्न”

कैलाशपति तो आदि, अनंत, अविनाशी और कल्याणस्वरूप है। वह सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है। महाँकालेश्वर तो मृत्युलोक के देव के रूप में सदैव पूजनीय है। शिव वैसे तो केवल हमारे भाव के भूखे है, और आशुतोष तो मात्र एक लोटे जल को अर्पित करने से तत्काल प्रसन्न होकर इच्छित

“श्रावण मास में शिव पूजन के ज्योतिषीय पक्ष एवं लाभ”

वैसे तो शिव आराधना सदैव ही उत्तम एवं मनोवांछित फल प्रदान करने वाला होती है, परंतु सावन का माह भूत-भावन पशुपति नाथ को सर्वाधिक प्रिय है। आइये जानते है शिव आराधना के कुछ ज्योतिषीय पक्ष एवं उनसे प्राप्त लाभों के बारे में। हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण मानसिक शांति है, शांत

कलयुग में यहां बसते हैं भगवान विष्णु

भगवान वेंकटेश्वर को विष्णु देव का अवतार माना जाता है। वेंकट पहाड़ी के स्वामी होने की वजह से भगवान विष्णु को वेंकटेश्वर कहते हैं। सात पहाड़ों का भगवान भी कहा जाता है भगवान विष्णु को। तिरुपति बालाजी मंदिर में साल के 12 महीनों में एक भी माह ऐसा नहीं गुजरता

कोडुंगल्लूर देवी मंदिरः मंदिर की मान्यता और इसका इतिहास

कोडुंगल्लूर देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन मंदिर है, जो कि केरल राज्य के त्रिशूर जिले में स्थापित है। वैसे तो दक्षिण भारत मे बहुत से मंदिर है परंतु यह मंदिर सब मंदिरों में सबसे अद्भुत है। कोडुंगल्लूर देवी मंदिर को "श्री कुरम्बा भगवती मंदिर" के नाम से भी जाना जाता है।

जब समझ आ गई नारद मुनि को भगवान की माया

देवर्षि नारद जयंती प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। देवर्षि नारद का नाम सभी लोकों में माननीय है। जैसा कि पुराणों में वर्णित है नारद मुनि ब्रम्हाजी के मानस पुत्र थे, एक लोक की खबर दूसरे लोक तक पहुंचाने में उनकी अहम्

जन जन के हृदय सम्राट बाबा हरदेव सिंह जी

बाबा हरदेव सिंह जी महाराज के एक बार भी जिस किसी को दर्शन हुए वह उनका ही होकर रह गया। बहुत दिव्य और मनोहारी रूप था उनका,जिसकी गहरी छाप जिस पर भी पड़ी वह उसके हृदय में अमिट हो गई। उनकी दृष्टि अत्यंत विशाल थी। हर भाषा हर देश के

बुद्ध पूर्णिमा- सम्पूर्ण मानव जाति के लिये एक महत्वपूर्ण दिन

बुद्ध पूर्णिमा न केवल बौध धर्म के अनुयायियों के लिए बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिये एक महत्वपूर्ण दिन है। उनको सबसे महत्वपूर्ण भारतीय आध्यात्मिक महामनीषी, सिद्ध-संन्यासी, समाज-सुधारक धर्मगुरु में से एक माना जाता हैं। महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका लोकहितकारी चिन्तन एवं कर्म

15वीं शताब्दी में हुआ था मंदसौर के ऐतिहासिक किले का निर्माण

मालवा और मेवाड़ के मध्य स्थित होने से रहा है संधि स्थल मंदसौर के ऐतिहासिक किले का निर्माण 15 वी शताब्दी में मांडू के सुल्तान हुशंगशाह ने करवाया था । इसका प्रमाण गुजरात में मिले ग्रंथ निराली सिकंदरी में है । इस किले का निर्माण राज्य के उत्तरी और पश्चिमी सीमा

मंदसौर के तैलिया तालाब के उत्थान से पतन तक का इतिहास: 484 बीघा में स्थापित था तैलिया तालाब

तैलिया तालाब के जीर्णोध्दार के लिए साहू तैली समाज के परिवारों ने दी थी 484 बीघा जमीन इसलिए नाम पड़ा तैलिया तालाब मंदसौर । तैलिया तालाब की उत्पत्ति को लेकर कोई संदेह नहीं है क्योंकि राजा-महाराजाओं का इतिहास बताता है कि तैलिया तालाब 484 बीघा में स्थापित था और तैलिया तालाब

बावड़ी का जलस्तर बढ़ते ही होता है महादेव का जलाभिषेक

महाशिवरात्रि उत्सवः 1 क्विटल लड्डू की महाप्रसादी, बटेगी ठंडाई मंदसौर । गणपति चौक जनकुपूरा स्थित प्राचीन बावड़ी में स्थित श्री जलेश्वर महादेव मंदिर पर महाशिवरात्रि पर्व उत्साह एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा । मंदिर समिति द्वारा ठंडाई एवं ड्रायफ्रूट की प्रसादी का वितरण किया जाएगा । तैयारियां पूर्ण कर ली