You are here
Home > युवा > पोस्टर मेन कहो या ट्री-मेन लेकिन समाज को जागृत करने में दे रहे है यह अपना अमूल्य योगदान

पोस्टर मेन कहो या ट्री-मेन लेकिन समाज को जागृत करने में दे रहे है यह अपना अमूल्य योगदान

शासकीय माध्यमिक विद्यालय गल्याखेड़ी के शिक्षक श्री श्याम सिंह चुण्डावत

मंदसौर, 31 मई । आप लोगों ने सुपरमेन, बैटमेन और आयरनमेन के बारे में तो सुना ही होगा, वैसे तो यह सुपर हीरो कहलाते है और इनके ऊपर कई कॉमीक्स बुक और कई हॉलीवुड फिल्में भी बनी है लेकिन यह सिर्फ फिल्मों और कॉमिक्स बुक के पात्र है, लेकिन असल जिन्दगी में यह असली हीरो नहीं है लेकिन उसके बावजूद हमारे देश के बच्चे और युवा वर्ग इन सुपर हीरो के दीवाने है ।

इन काल्पनिक सुपर हीरो के प्रति बच्चो और युवाओं की दिवानगी कम नहीं की जा सकती है लेकिन हमने इसी दिशा में रियल हीरो की तलाश प्रारंभ की ताकि इन रियल हीरो को ढूंढकर उनको द्वारा किए जा रहे कार्यों को हम आज की युवा पीढ़ी के सामने उन्हें उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर सके ।

हमारी तलाश शुरू ही हुई थी कि ‘घूमता आईना’ की टीम ने हमें एक सच्चे ‘रियल हीरो’ का पता बताया।  इनका नाम तो हमारे लिए भी नया था लेकिन इनके द्वारा किए गए कार्यों पर हमारी नजर गई तो हम अचरज में पड़ गये क्योंकि बचपन से बस स्टैण्ड, रेल्वे स्टेशन, अस्पताल और सार्वजनिक स्थानों पर संदेश युक्त जिन रंग-बिरंगे पोस्टरों को हम देखते चले आ रहे थे वह पोस्टर ओर किसी ने नहीं इन्होंने ही अपने हाथों से बनाये थे ।

मंदसौर के पोस्टर-मेन एवं ट्री-मेन शिक्षक श्री श्याम सिंह जी चुण्डावत

आज हम एक ऐसे व्यक्तित्व के बारे में आपको बता रहे है जो 35 सालों से निरंतर निःस्वार्थ भाव से समाज में जन जागरूकता लाने के उद्देश्य से कार्य कर रहे है । वैसे तो श्री श्याम सिंह चुण्डावत उनके द्वारा किए गए कार्य का कोई श्रेय नहीं लेना चाहते लेकिन उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों के प्रति जो उनकी सेवा और समर्पण के भाव है उन्हें उजागर करने से हम खुद को रोक भी नहीं पाए ।

वर्तमान में कोरोना महामारी का दौर चल रहा है इस दौरान आप में से कई कोरोना वायरस से संक्रमित होकर जिला अस्पताल में एडमिट भी हुए होंगे तब जिला अस्पताल के प्रवेश द्वार, अस्पताल के गलियारों और अस्पताल में अन्य जगहों पर आपने हाथ से बने हुए पोस्टर जिसमें पेंटिंग और लिखित संदेश जैसे मास्क पहनें, सामाजिक दूरी का पालन करें, वृक्ष बचाने और वृक्ष लगाने ऐसे पोस्टर चिपके हुए देखे होंगे । साथ ही पेट्रोल पम्पों पर, एटीएम पर, सड़कों के आसपास, सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैण्ड और रेल्वे स्टेशनों पर भी इसी प्रकार के संदेश युक्त पेंटिंग करे हुए पोस्टरों पर आपकी नजर गई होगी यह पोस्टर अन्य किसी ने नहीं बल्कि शिक्षक श्री श्याम सिंह चुण्डावत ने खुद बनाकर अपने हाथों से इन जगहों पर इनको चिपकाया है ।

वैसे तो शिक्षक श्री श्याम सिंह चुण्डावत को हर कोई नहीं जानता और जो जानता है उन्होंने इन्हें पोस्टर मेन की उपाधि दे रखी है । शिक्षक रहते हुए 35 सालों से श्री श्याम सिंह चुण्डावत अपने हाथों से पोस्टर और पोस्ट कार्ड बनाकर उस पर पेंटिंग बनाकर संदेश लिखने का काम कर रहे है और 1 लाख से ज्यादा पोस्टर वह अभी तक बना चुके है । श्री श्याम सिंह चुण्डावत अपने पोस्टरों के माध्यम से पर्यावरण के प्रति लोगोंको सजग करने और साफ-सफाई जैसी अच्छी आदतों पर जोर देते है ।

वर्तमान में कोरोना काल के चलते स्कूलों में बच्चे नहीं आ रहे है उसके बावजूद श्री श्याम सिंह चुण्डावत स्कूल आते है और यहां घंटो बैठकर अपने हाथों से पेटिंग वाले पोस्टर बनाकर उन पर संदेश लिखते है और फिर अपनी स्कूटी से उसको मंदसौर नगर में लगाने के लिए निकल जाते है । जैसे ही श्री श्याम सिंह चुण्डावत का स्कूल का कार्य पूरा होता है वैसे ही वह अपना स्कूटर लेकर पोस्टर चिपकाने निकल जाते है, वह ऐसी जगहों का चयन करते है जहां लोगों की नजर उनके पोस्टरों पर ज्यादा से ज्यादा पड़े।

एक लाख से ज्यादा पोस्टर पूरे देश में फैलाए

शिक्षक श्री श्याम सिंह चुण्डावत ने जब शिक्षक के रूप में अपना कार्य आरंभ किया और बच्चों को पढ़ाना शुरू किया तो उन्हें लगा कि यह जो शिक्षा का क्षेत्र है वह स्कूल तक ही सीमित था। फिर उन्हें विचार आया कि वह किस तरह विश्व को, देश को संदेश दें तभी से श्री चुण्डावत पोस्टर बनाने का कार्य कर रहे है और पोस्टर बनाने का कार्य करते-करते उन्हें 35 साल हो गए है और अभी तक एक लाख से ज्यादा पोस्टर उन्होंने पूरे देश में फैलाए है । वर्तमान में श्री श्याम सिंह चुण्डावत रिटायरमेंट की उम्र में आ गए है लेकिन जब वह जवान थे तो दूसरों शहरों में एक-एक हजार, दो-दो हजार पोस्ट कार्ड व पोस्टर लेकर जाते थे तथा बस स्टैण्ड, रेल्वे स्टेशन, बैंक, कृषि मंडीयां, स्कूल, कॉलेज में इन पोस्टरों को खुद अपने हाथों से चिपकाते थे ।

पर्यावरण के प्रति भी लगाव कुछ कम नहीं

पोस्टर मेन के रूप में शिक्षक श्री श्याम सिंह चुण्डावत के कार्यों को तो हमने आपको बता दिया लेकिन श्री चुण्डावत सिर्फ पोस्टर तक सीमित नहीं है, उनका पर्यावरण के प्रति भी लगाव कुछ कम नहीं है ।

प्रतिदिन पोस्टर बनाकर अपने संदेशों के माध्यम से जनता में जागरूकता फैलाने के साथ-साथ श्री चुण्डावत प्रतिदिन एक पौधा भी लगाते आ रहे है । श्री श्याम सिंह चुण्डावत रोजाना अपने स्कूटर पर एक पानी की टंकी, गेती/फावड़ा और एक पौधा लेकर रोज निकल जाते है और फिर खुद अपने हाथों से गेती/फावड़े की मदद से गङ्ढा खोदकर पौधा रोपते है तथा जब तक वह पौधा वृक्ष का रूप न ले लें तब तक उसका संरक्षण भी करते है ।

श्री श्याम सिंह चुण्डावत ऐसे वृक्षों को ज्यादा महत्व देते है जिनकी उम्र लम्बी रहती है । उनका इस संबंध में यह मानना है कि ज्यादा उम्र वाले वृक्ष छाया भी देंगे साथ ही पर्यावरण का संतुलन बनाने में भी लम्बे समय तक मददगार रहेंगे। श्री चुण्डावत का मानना है कि हम वृक्ष लगाएंगे तो इन वृक्षों के लगाने से पक्षियों का संरक्षण भी होगा, अगर वृक्ष खत्म हो जाएंगे तो पक्षियों का भी सर्वनाश हो जाएगा और इससे पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा क्योंकि पक्षी ही ऐसे प्राणी है जो पेड़ों के बीज खाकर दुर्लभ प्रजाति के वृक्षों को पहाड़ों, मैदानों में उगाने में अहम भूमिका निभाते है । पेड़ों की जो नस्ल खत्म हो रही है उसे बचाने में पक्षी अपना योगदान दे रहे है तो हमारा भीर् कत्तव्य होता है कि हम पेड़ों को बचाए और ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए ।

श्री चुण्डावत का कहना है कि सिर्फ पौधा रोपने से कुछ नहीं होता, उसका संरक्षण करना, उसको बराबरी से पानी पिलाना और उसे वृक्ष बनाना भी हमारी ही जिम्मेदारी होती है । किसी पेड़ को बड़ा करना जिम्मेदारी का काम है । श्री चुण्डावत पर्यावरण संरक्षण का पाठ अपने स्कूल के बच्चो को भी पढ़ाते है और अपने शिक्षक के द्वारा पढ़ाया गया पर्यावरण संरक्षण के इस पाठ का पालन बच्चे बखूबी करते है।

श्री श्याम सिंह चुण्डावत खुद तो पौधे लगाते ही है साथ ही किसी अन्य को पौधा लगाना हो तो उसे भी पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराते है। कई लोग है जिन्होंने श्री चुण्डावत के माध्यम से पौधे लगाए है और उन पौधों का संरक्षण कर आज उन्हें वृक्ष बनाया है । श्री चुण्डावत को यह तक पता है कि कौन सी जमीन पर कौन सा पौधा पनपेगा और कौन सा नहीं । जमीन का चयन कर श्री चुण्डावत उस पर वही पौधा लगाते है जो उस मिट्टी के अनुकूल बड़ा हो सकता है ।

कुछ महीनों में श्री श्याम सिंह चुण्डावत रिटायर होने वाले है । उनका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति भी जागरूकता आना चाहिए । सरकार अपना काम कर रही है लेकिन हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम अपने पर्यावरण का संरक्षण करें ओर उसे बचा कर रखे ।

Sharing is caring!

Similar Articles

Leave a Reply

Top