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जीना इसी का नाम हैः रात्रि पुलिस गश्त के दौरान हुए एक बुजुर्ग दंपत्ति से रूबरू

रात्रि को थाना क्षेत्र में गश्त के दौरान, रेलवे ट्रैक के समीप त्रिपाल से बनी झोपड़ी के अंदर आग जलती हुई दिखाई दी तो मन में सोचा कि  रात्रि 2 बजे क्या हो रहा है ? झोपड़ी के अंदर क्या जल रहा है ?

समीप जाकर देखा तो एक बुजुर्ग व्यक्ति आग के पास में बैठा हुआ तथा एक महिला पास में बैठे हुए जलते चूल्हे पर मक्का की रोटी बना रही थी । मैंने जिज्ञासावश उस बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा कि काका रात्रि की 2 बज रही है, आप अब खाना क्यों बना रहे हो ?

काका ने हंसते हुए मुझसे दोबारा पूछा कि साहब कितनी बज गई फिर मैंने बोला कि काका अभी रात की 2 बज रहे हैं । काका फिर हंसते हुए बोले कि साहब हम समझे कि सुबह की 5 बज गई हैं और काम पर जल्दी जाना है इसलिए अभी खाना बना रहे हैं…!

उस बुजुर्ग व्यक्ति की बात सुनकर मन टूट सा गया और मन ही मन विचार आया कि इस मॉडर्न युग में  बुजुर्ग दंपत्ति को क्या समय हो रहा यह तक पता नहीं और काम करने इच्छा, अपने काम के प्रति समर्पण की भावना के कारण रात्रि में 2 बजे उठकर खाना बना रहे हैं उसके बावजूद  बुजुर्ग व्यक्ति के चेहरे पर खुशी थी किसी प्रकार का कोई दुख नहीं.. पास बैठी महिला वह भी हंसने लगी और बोली की कोई बात नहीं साहब खाना बनाकर सो जाएंगे और सुबह जल्दी काम पर चले जाएंगे…!

जब झोपड़ी के आसपास निगाह डाली तो आस पास झाड़ियां वगैरह है कोई किसी प्रकार की सांसारिक सुख सुविधा नहीं फिर भी अपने जीवन से दोनो खुश हैं ।

जबकि एक तरफ समाज के कुछ व्यक्ति (युवक, युवतियां, बच्चे) जरा सी माता पिता की डांट से या किसी सांसारिक सुख सुविधाओं की कमी को लेकर या किसी अन्य कारण से डिप्रेशन का शिकार होकर आत्महत्या तक कर लेते हैं। जिनको ईश्वर की कृपा से जीवन मे तमाम सांसारिक सुख सुविधाएं उपलब्ध हैं वह तक जिंदगी में छोटी-छोटी बात को लेकर गमों में डूबते हुए या अपने आप को जिंदगी से हारा हुआ समझते हुए आत्महत्या जैसा जघन्य अपराध तक कर लेते हैं और इन बुजुर्ग दंपत्ति को देखो कि इनके पास में समय देखने के लिए घड़ी तक नहीं है… सुबह काम पर जल्दी जाने के उद्देश्य से रात को 2 बजे उठकर खाना बना रहे हैं। फिर भी खुश है किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं है ऐसे इंसानों को दिल से प्रणाम करता हूं जो अपने काम को सर्वोपरि मानते हैं एवं अपनी कम सुख सुविधाओं में भी खुश रहना जानते हैं।  जिंदगी से किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं।

मैंने जाते समय उक्त बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा कि आपको किसी प्रकार की कोई जरूरत हो तो बताओ तो उस बुजुर्ग ने फिर हंसते हुए वही जवाब दिया कि मेरे पास पर्याप्त साधन है अभी मुझे किसी प्रकार की कोई आवश्यकता नहीं है..!

मेरे साथ घटित इस वाक्ये को आपके साथ साझा करने का सिर्फ इतना ही उद्देश्य है कि जो व्यक्ति अपने आप को बहुत अकेला महसूस करता है या ऐसा सोचता है कि मेरे पास बहुत कम सुख सुविधा है या वह अपने आपको जीवन से बहुत दुखी समझता है तो उनसे मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि दोस्तों जिंदगी रही तो सब कुछ होगा, आप जहां हो जिस हालत में हो बहुत खुश नसीब हो कुछ लोगों को तो वह सुख भी नसीब नहीं हो रहा है। हमेशा अपने से नीचे वाले को देख कर खुशी से जीयो आपके पास किसी चीजों की कमी है तो उसे पाने के लिए मेहनत करते हुए अपने इष्ट परमात्मा पर भरोसा रखो। एक दिन वह चीज जरूर आपकी होगी पर किसी प्रकार का डिप्रेशन का शिकार होकर किसी भी तरीके का गलत कदम मत उठाओ क्योंकि जिंदगी में बहुत लोग ऐसे हैं जिनको जिंदगी जीने की कोई सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है फिर भी वह लोग बहुत खुशी से जी रहे हैं।

न हो कमीज तो पाँव से पेट ढंक लेंगे…
ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए

लेखकः
विनोद राठौर
(वर्तमान में मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के शामगढ़ थाने में पदस्थ पुलिस आरक्षक)

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