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अपमिश्रित विमल गुटखा बेचने वाले व्यापारी को 6 वर्ष 6 माह का सश्रम कारावास

#Vimal

खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने लिए थे सेम्पल, जांच में पाए गए थे अपमिश्रित !

नीमच। नीरज मालवीय, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, नीमच द्वारा एक आरोपी को अपमिश्रित केसर युक्त विमल गुटखा बेचने के आरोप का दोषी पाकर कुल 06 वर्ष 06 माह के सश्रम कारावास और 4,500रू. के जुर्माने से दण्डित किया गया।

सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रितेश कुमार सोमपुरा द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 08 वर्ष पूर्व दिनांक 19.05.2011 को दोपहर के लगभग 02.45 बजे खाद्य सुरक्षा अधिकारी यशवंत कुमार शर्मा नियमित निरीक्षण हेतु विजय एजेंसी, टैगोर मार्ग, नीमच पर पहुंचे, जहॉ पर विभिन्न ब्रांड के गुटखे व अन्य खाद्य सामग्रीयों का विक्रय किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा इनकी शुद्धता पर संदेश होने से उनके द्वारा एजेंसी से केसर युक्त विमल गुटखा के 6 सील्ड पैकेट के नमुने जॉच हेतु 600रू. नकद भुगतान कर लिया गया तथा 13 पैकेटो को सील्ड कर बाण्ड ऑफ श्योरिटी भरवाकर सुरक्षित एजेंसी में ही रखवा दिये गये। व्यापारी से क्रय किये गये 6 पैकेटो को जॉच लोक विश्लेषक, राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल तथा स्थानीय (स्वास्थ्य) प्राधिकारी पदेन उपसंचालक, नीमच को भेजा गया, दोनों संस्थानों से प्राप्त जॉच रिपोर्ट में केसर युक्त विमल गुटखा अपमिश्रित होना पाया गया, जिस कारण विजय एजेंसी के संचालक गंगाराम रोहिडा विरूद्ध नीमच न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन की ओर से रितेश कुमार सोमपुरा, एडीपीओं द्वारा न्यायालय में खाद्य सुरक्षा अधिकारी एवं अन्य आवश्यक गवाहों के बयान कराकर आरोपी द्वारा अपमिश्रित केसर युक्त विमल गुटखा का भण्डारण, विक्रय एवं क्रय बिल प्रस्तुत नहीं किये जाने अपराध को प्रमाणित कराकर आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया। श्री नीरज मालवीय, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, नीमच द्वारा आरोपी गंगाराम पिता हरगुनदास रोडिहा, उम्र-61 वर्ष, निवासी-सिंधी कॉलोनी, जिला नीमच को खाद्य अपमिश्रण अधिनियम 1954, की धारा 7(1) सहपठित धारा 16(1)(ए)(1), में 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 2,000रू के जुर्माना, धारा 16(1)(ए)(2) में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 2,000रू के जुर्माना एवं धारा 7(5) सहपठित धारा 16(1-सी) में 6 माह के सश्रम कारावास एवं 500रू के जुर्माना, इस प्रकार आरोपी को कुल 06 वर्ष 06 माह के सश्रम कारावास एवं 4,500 रू. के जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से रितेश कुमार सोमपुरा, एडीपीओ द्वारा पैरवी की गई।

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