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देहदान-अंगदान जागरूकता अभियानः 450 लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित कर चुकी है कंचन शर्मा

कंचन शर्मा की माताजी ने “नेत्रदान“ कर औरों की ज़िंदगी की रोशन

जयपुर। अंगदान समाज के लिए एक चमत्कार साबित हुआ है । अंगदान करने वाला व्यक्ति इस महान कार्य के माध्यम से अंग प्राप्तकर्ता को एक नया जीवन देता है । अंगदान तब होता है जब किसी व्यक्ति के शरीर से अंग को उसकी सहमति से हटा दिया जाता है । अगर वह व्यक्ति जीवित है तो उसकी आज्ञा से और यदि उसकी मृत्यु हो गई हो तो उसके अपने परिवार के सदस्यों की अनुमति से अनुसंधान या प्रत्यारोपण के उद्देश्य के लिए ।

अंगदान की प्रक्रिया को दुनिया भर में प्रोत्साहित किया जाता है । शारीरिक अंगो की मांग दुनिया भर के दाताओं की संख्या की तुलना में काफी अधिक है । दाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए अंगदान करने हेतु जनता के बीच संवेदनशीलता जगाने की आवश्यकता है ।

आम जनता के बीच संवेदनशीलता जगाने के उद्देश्य से जयपुर निवासी कंचन शर्मा लम्बे समय से प्रयासरत है । कंचन शर्मा अब तक करीब 450 लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित कर चुकी है । गौरतलब है कि कंचन शर्मा देहदान-अंगदान जागरूकता अभियान से भी जुड़ी हुई है ।

कंचन शर्मा की माताजी ने किया “नैत्रदान”

कोटा गुमानपुरा निवासी कला देवी का अचानक निधन होने के बाद उनकी नेत्रदान करने की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए परिवार जनों ने उनका नेत्रदान करवाया। परिवारजनों ने बिना देरी किए हुए एनाटॉमी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ प्रतिभा जयसवाल को सूचना दी।

सूचना मिलते ही मेडिकल कॉलेज नेत्र रोग विभाग की टीम के नेत्रदान सलाहकार भूपेंद्र सिंह हाडा, टेक्नीशियन हेमंत यादव, नेत्र रोग विभाग की डॉ चंचल गुप्ता, डॉ अनीता उनके घर रवाना हुई । वहां डॉक्टर चंचल गुप्ता और डॉ अनीता ने कलावती देवी का मेडिकल मुआयना जांच की और उनके परिवार की सहमति से टेक्नीशियन हेमंत यादव ने नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया डॉक्टर चंचल गुप्ता और डॉ अनीता के निर्देशानुसार नेत्रदान को संकलित किया गया।

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